प्रिंटिंग मशीन का आविष्कार किसने किया ?

Printing Machine Ka Aavishkar Kisne Kiya

दोस्तों, आज हम एक ऐसी चीज़ के बारे में बात करेंगे जिसने दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया – प्रिंटिंग प्रेस!

जब मैंने पहली बार प्रिंटिंग प्रेस के बारे में सुना तो मुझे लगा कि ये कोई ऐसी मशीन होगी जो बड़े-बड़े अक्षरों में लिखती होगी “प्रिंटिंग प्रेस”। लेकिन जब मैंने इसके बारे में पढ़ा तो पता चला कि यह वास्तव में एक ऐसी मशीन है जिसने हमारे जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया!

15वीं सदी में प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार से पहले पुस्तकें हाथ से लिखकर तैयार की जाती थीं। एक पुस्तक लिखने में सालों लग जाते थे और वे बहुत महंगी भी होती थीं।

लेकिन प्रिंटिंग प्रेस की मदद से, पुस्तकों की कॉपियाँ बहुत जल्दी और सस्ते में बनाई जा सकती थीं!

चलिए जानते हैं कि आखिर इस अद्भुत मशीन का आविष्कार किसने किया था…

जोहानेस गुटेनबर्ग – प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कारक

1440 में, जर्मन मुद्रक जोहानेस गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया।

गुटेनबर्ग एक बड़े दिमाग के व्यक्ति थे। उन्होंने सोचा कि अगर हर बार पूरी पुस्तक की जगह सिर्फ़ एक पृष्ठ छापा जाए, तो पुस्तकें बहुत तेज़ी से बन सकती हैं।

इसलिए उन्होंने लकड़ी की एक प्लेट पर अक्षरों को जोड़ दिया और फिर उस पर इंक लगाकर कागज़ पर छापा। एक पृष्ठ तैयार हो गया!

फिर वो अक्षरों को बदलकर अगला पृष्ठ छापे। इस तरह पूरी पुस्तक छापने में बहुत कम समय लगा।

मेरे हिसाब से तो गुटेनबर्ग जी के दिमाग में बिजली चमकी होगी!

गुटेनबर्ग के प्रिंटिंग प्रेस की विशेषताएँ

गुटेनबर्ग का प्रिंटिंग प्रेस कुछ विशेष चीज़ों से बना था:

  • लोहे के अक्षर – इन्हें एक फ्रेम में जोड़ा जाता था। एक बार सेट होने के बाद इन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता था।
  • तेल से सनी लकड़ी की प्लेट – यह प्लेट प्रिंटिंग के लिए आवश्यक सतह प्रदान करती थी।
  • प्रेस – एक बड़ी मशीन जिससे लकड़ी की प्लेट पर दबाव डाला जाता था ताकि अक्षर उसपर अंकित हो जाएँ।
  • स्याही – यह अक्षरों में लगाई जाती थी ताकि वे कागज़ पर छप सकें।

इन सभी चीज़ों को मिलाकर, गुटेनबर्ग ने एक ऐसी मशीन बनाई जिससे पुस्तकों को बड़ी संख्या में छापा जा सकता था।

वाह, कितना शानदार आविष्कार था!

प्रिंटिंग प्रेस का प्रभाव

प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार ने दुनिया पर काफ़ी प्रभाव डाला:

  • ज्ञान का प्रसार – पुस्तकों की संख्या में वृद्धि हुई और ज्ञान सभी तक पहुँचने लगा।
  • धार्मिक सुधार आंदोलन – मार्टिन लूथर जैसे सुधारकों ने अपने विचारों को तेज़ी से फैलाने के लिए प्रेस का इस्तेमाल किया।
  • राष्ट्रीय भाषाओं का विकास – पुस्तकें स्थानीय भाषाओं में मुद्रित होने लगीं जिससे उनका विकास हुआ।
  • कीमतों में कमी – पुस्तकों की कीमतों में काफी कमी आई जिससे वे आम लोगों के लिए भी पहुँच योग्य हो गईं।

इस तरह प्रिंटिंग प्रेस ने हमारे समाज, संस्कृति और ज्ञान पर गहरा प्रभाव डाला। बिना इसके, हमारी दुनिया बिल्कुल अलग होती!

सारांश

फिर से याद दिला दूँ कि 15वीं सदी में जर्मन मुद्रक जोहानेस गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया था।

उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई जिसमें लोहे के अक्षरों को इस्तेमाल करके पृष्ठों को छापा जा सकता था।

इसके चलते पुस्तकों का मुद्रण बहुत तेज़ और सस्ता हो गया।

प्रिंटिंग प्रेस ने ज्ञान के प्रसार और धार्मिक सुधार आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह एक ऐसा आविष्कार था जिसने हमारी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया!

आशा करता हूँ आपको प्रिंटिंग प्रेस के इतिहास के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी। अगर आपके पास कोई सवाल है तो मुझे ज़रूर बताइएगा!

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